कैसी थी देहरादून की नहरें , क्यों बंद हो गई , तो आज देहरादून की नहरों की कहानी घुम्मकड़ पहाड़ी की जुबानी “देखिए वीडियो”

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https://youtu.be/EYYP_i5Tmv8 देहरादून की सबसे पुरानी नहर इसी से मिली अंग्रेजो को गंगनहर बनाने की प्रेरणा

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मैंने देहरादून जैसा शहर नहीं देखा जहां वह सब कुछ है जो एक इंसान को बांधे रखने के लिए काफी है इसलिए मेरी कोशिश है की बाकी दुनिया भी देहरादून के बारे में जाने इसलिए देहरादून की ऐसी धरोहर जिसके बारे में हमारी पीढ़ी या हमारे बच्चे नहीं जानते जी हां आज से आपको देहरादून की नहरों के बारे में बताएंगे कि कैसे देहरादून की नहर है यहां के मौसम को प्रभावित करती थी और अब जब देहरादून की लहरों को शहर के अंदर जमींदोज कर दिया गया है तो आप देहरादून के मौसम के क्या हाल हैं आज हम आपको राजपुर नहर जो सबसे पुरानी नहर है उसके बारे में बताएंगे शहर में नहर का वजूद तो नही रहा पर कुछ जगह के नाम इस नहर की याद दिलाते रहेते हैं जैसे नहर वाली गली, धारा चौकी, कैनाल रोड़, ई सी रोड़ आदि आदि। यह ’राजपुर नहर’ के नाम से जानी जाती थी। इतिहासकार विजय भट्ट बताते हैं कि यहां की खेती बागवानी को हरा भरा और उपजाउ बनाने के बनी राजपूर नहर देहरादून की सबसे प्राचीन नहर थी। इस नहर का निर्माण स़त्रहवीं सदी में रानी कर्णावती ने कराया था। यह नहर बारीघाट में रिस्पना राव से पानी लेकर काठबंगला, जाखन होती हुई दिलाराम बाजार में दो शाखाओं में बंट जाती थी। एक शाखा नगर के मध्य भाग में मंदिरों के तालाबों को पानी देती हुई दरबार सहाब तक व दूसरी पूर्व की तरफ जाने वाली ईस्ट कैनाल डालनवाला के खेत बागों की सींचती हुई आराघर होती हुई मोथरोवाला तक जाती थी। आज यह नहर देहरादून के कंक्रीटी विकास की भेंट चढ़ गई। देहरादून जिले में खेती का विकास अंग्रेजों के आगमन के बाद हुआ। इसके लिये उन्होंने जमीदारों को विशेष ग्रांट भी दी थी और सिंचाई के लिये नहरों का निर्माण भी कराया था। यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि अंगे्रजों के आने से सौ साल पहले रानी कर्णावती द्वारा बनाई राजपुर केनाल ही ब्रिटिश शासकों के लिये प्रेरणा स्रोत बनी। अब आप रानी कर्णावती की क्षमताओं का अंदाजा लगा सकते हैं।रानी कर्णावती गढ़वाल के शासकों में बहादुर कुशल नेतृत्व वाली सख्त शासक रही हैुं। यद्यपि गढ़वाल के राजाओं के वंशावली में उनका जिक्र नही आता है, शायद यह महिला होने के कारण हो पर रानी कर्णावती के किस्से बहुत प्रचलित हैं। कहा जाता है कि 1635 ई में राजा महिपति शाह की मृत्यु के बाद रानी कर्णावती ने राज्य व्यवस्था अपने हाथ में ले ली थी क्योकि उस समय उनका पुत्र प्थ्वीपति शाह की आयु कम थी। उनको नक्कटी रानी भी कहा गया। उस समय दून के अच्छे दिन थे। दून की राजधानी नवादा थी। इन्ही रानी कर्णावती ने इस नहर को बनाया था जिसकी जिर्णोद्धार का काम बाद में अंग्रेजों ने किया। इसी रानी के नाम पर देहरादून का करनपुर गांव बसाया गया। रानी कर्णावती के प्रतिनिधि अब्जू कुवंर के नाम से अजबपूर गांव बसाया गया था। इस दृष्टि से यह नहर कृषि व नहरों के इतिहास में पुरातात्चिक महत्व की थी जो विकास की दौड़ में अंधे हाकिमों के चलते आज गायब हो गई है।इस नहर के वर्तमान हालात को देखने के लिये हम निकले तो इसके हालात देखकर दुःख तो जरूर हुआ लेकिन खुशी ये है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को बता सकेंगे हमने ये नहरे देहरादून में बहती देखी हैं।

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