उत्तराखंड में कोरोना के बढ़ते खतरे से फिर पड़ने लगा पर्यटन व्यवसाय पर बुरा प्रभाव

उत्तराखंड में देश के 12 राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए 72 घंटे पूर्व की कोविड निगेटिव रिपोर्ट लाने संबंधी राज्य सरकार की सलाह और राज्य की सीमाओं में जांच में तेजी लाए जाने के निर्णय से पर्यटन व्यवसायी परेशान हैं। तमाम होटलों में अप्रैल के लिए तीस फीसदी बुकिंग निरस्त हो गई है। मई-जून को लेकर भी कारोबारी और पर्यटक आशंकित हैं। अप्रैल में मैदानी क्षेत्रों में गर्मी बढ़ने और गुड फ्राइडे, नवरात्र, महावीर जयंती सहित अनेक छुट्टियों के कारण पर्यटन व्यवसायी बहुत आशान्वित थे। तमाम होटल इस दौरान एडवांस में ही फुल हो गए थे। वर्तमान में भी हर सप्ताहांत में यहां भारी भीड़ उमड़ रही थी जिससे उनमें सीजन को लेकर उत्साह था।मंगलवार को जैसे ही राज्य सरकार के दिशानिर्देश आए तीस फीसदी बुकिंग निरस्त हो गई। उत्तर भारतीय होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के बोर्ड सदस्य होटल शेवरॉन के मालिक प्रवीण शर्मा के अनुसार अप्रैल में सामान्य बुकिंग के अलावा डेस्टिनेशन वेडिंग की भारी बुकिंग आई थीं। तीस फीसदी बुकिंग आज ही निरस्त हो गई है। उनका कहना है कि इस समय होटल व पर्यटन उद्योग गंभीर संकट में है।बीते वर्ष जैसे-तैसे कर्ज लेकर लोगों ने काम चलाया अगर इस वर्ष भी व्यवसाय नहीं चल पाया तो आधे से ज्यादा कारोबारी बर्बाद हो जाएंगे। प्रसिद्ध होटल मनु महारानी के जीएम नरेश गुप्ता ने बताया कि अभी उन्होंने केवल 22 कमरे ही खोले थे। अप्रैल प्रथम सप्ताह के लिए ये फुल हो चुके थे लेकिन आज ही इनमें तीस फीसदी बुकिंग निरस्त हो गई। होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन नैनीताल के पदाधिकारी अल्का होटल के वेद साह के अनुसार अप्रैल के लिए बहुत अच्छी बुकिंग आई थी लेकिन कोरोना दिशानिर्देश आते ही 25 फीसदी बुकिंग निरस्त हो गई।अभी भी पर्यटक लगातार संपर्क कर बुकिंग को लेकर आशंका जता रहे हैं। व्यवसायियों का मानना है कि सरकार बॉर्डर में चेकिंग बढ़ा दे और संक्रमित पाए जाने पर प्रवेश न दे लेकिन 72 घंटे की रिपोर्ट लाने की अपनी सलाह हटाए।

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