धीरेंद्र प्रताप ने गैरसैण ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने की अधिसूचना जलाकर जताई फैसले पर नाराजगी

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उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने आज गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने को लेकर राज्यपाल द्वारा घोषित अधिसूचना की प्रतियों को सरेआम फाड़ कर अपना विरोध दर्ज किया, जिसको उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शहीदों की सपनों की भावना के विरुद्ध उठाए गए कदम के प्रति अपनी “नाराजगी व्यक्त करने का प्रतीक” बताया।
उल्लेखनीय हैं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के झंडे तले पिछले 2 दिनों से उत्तराखंड के तमाम जनपदों में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने की अधिसूचना की आंदोलनकारी विरोध स्वरूप प्रतियां जलाने पर लगे है। जिसका आवाहन धीरेंद्र प्रताप ने चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के मुख्य संरक्षक के तौर पर किया हुआ है। धीरेंद्र प्रताप ने आज भी कहा कि “जब तक गैरसैंण को शहीदों की भावना के अनुरूप उत्तराखंड की स्थाई राजधानी के तौर पर घोषित नहीं किया जाता तब तक आंदोलनकारी सड़कों पर अपना शांतिपूर्ण और अहिंसक गांधीवादी विरोध जारी रखेंगे।” इस बीच आज भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में जिसमें किच्छा ,खटीमा, चंपावत उत्तर प्रदेश में लोनी गाजियाबाद, दिल्ली ,बागेश्वर,हरिद्वार,कोटद्वार समेत अनेक स्थानों पर यहां तक कि द्वाराहाट में भी आंदोलनकारी अपने घरों से निकले और उन्होंने राज्यपाल की अधिसूचना को जनविरोधी बताते हुए इसे जलाकर अग्नि को भेट करने का सिलसिला जारी रखा। धीरेंद्र प्रताप ने बाद में स्वयं भी इस अधिसूचना की प्रतियो को अग्नि को समर्पित किया और कहा सरकार राज्य आंदोलनकारियों की भावना का सम्मान करें और जल्द गैरसैण को स्थाई राजधानी घोषित कर, शहीदों के सपने पूरे करेंऔर विकास कार्य आरंभ करें ।उन्होंने कहा उत्तराखंड राज्य 7000 करोड़ रुपयों के कर्जे में अभी दबा है। कोरोना से धन की हानि की मात्रा और बढ़ेगी ।ऐसे में राज्य कैसे दो-दो राजधानियों का बोज सह सकेगा। मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि इंग्लैंड और अमेरिका तक में इस जनविरोधी बिल के विरोध की तैयारी है और एक-दो दिनों में वहां के लोग भी जो प्रवासी उत्तराखंडी हैं। उत्तराखंड सरकार के इस कदम को जनविरोधी कदम मानते हुए,इस शहीदो की भावना विरोधी व
ग्रामीण विकास विरोधी अधिसूचना की प्रतियों को जला कर अपना विरोध दर्ज करेंगे।

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