उत्तराखंड विधानसभा में मनमानी भर्तियों को लेकर भले ही हंगामा हो रहा हो। लेकिन पूर्व स्पीकर प्रेम चंद अग्रवाल को इसकी कोई परवाह नहीं है। शनिवार को मीडिया ने उनसे इस बारे में सवाल किए तो बेहद आक्रामक और चुनौती भरे अंदाज में प्रेम बोले, हां की हैं मैंने नियुक्तियां और तीन प्रमोशन देकर डिप्टी सेक्रेटरी को विस का सचिव बनाया है। विस में तो पहले भी इसी तरह से नियुक्तियां होती रही हैं।
पूर्व स्पीकर ने यह भी पूछा गया कि एक जूनियर अफसर को कई लोगों की वरिष्ठता को नजर अंदाज करके सीधे सचिव क्यों बनाया गया। इस पर प्रेम ने फिर उसी अंदाज में कहा कि हां, मैंने उसे तीन प्रमोशन देकर सचिव बनाया है। नियमों के तहत प्रमोशन में उन्होंने शिथिलता दी है। इसमें कहीं कोई अनियमितता नहीं हैं।

यहां बता दें की विस के मौजूदा सचिव मुकेश सिंघल पहले डिप्टी सेक्रेटरी (शोध) थे। इन्हें सचिव बनाने के लिए पहले ज्वाइंट सेक्रेटरी और तुरंत ही एडिशनल सेक्रेटरी पद पर प्रमोट किया गया। फिर प्रभारी सचिव बनाया गया और स्पीकर का कार्यकाल समाप्त होने से ऐन पहले स्थायी सचिव बना दिया गया। अहम बात यह भी कि सभी प्रमोशन एक साल के अंदर ही दे दिए गए। सचिव की नियुक्ति के लिए कोई आवेदन नहीं मांगा गया और न ही न्याय विभाग से प्रतिनियुक्ति पर तैनाती का कोई प्रयास किया गया।
सचिवालय सेवानिवृत हुए एक अधिकारी ने कहा कि प्रमोशन के मामले में एक साथ तीन प्रमोशन देने का विधानसभा अध्यक्ष को अधिकार नहीं है। मुकेश सिंघल को उस समय प्रभारी सचिव बनाया गया जब वह उप सचिव के पद पर था और विधानसभा की नियामवली में प्रभारी सचिव की व्यवस्था नहीं है।




