DEHRADUN NEWS

बिग ब्रेकिंग:- स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय में हिमालय दिवस पर हिमालय के संरक्षण पर मंथन

हिमालय दिवस पर स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय ने हिमालय के नाजुक इकोसिस्टम को बचाने, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने तथा जागरूकता फैलाने के लिए फैकल्टी सदस्यों, छात्रों और पर्यावरणविदों के साथ हिमालय दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया।

 

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि ICIMOD(नेपाल)के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एवं (ATREE) बेंगलुरु के स्ट्रैटेजिक एडवाइजर पद्मश्री प्रोफेसर एकलव्य शर्मा ने कहा कि हिमालय के भविष्य पर पुनर्विचार किया जाना अत्यंत आवश्यक है, उन्होंने अपने अनुभव और विचार हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र (HKH)पर केंद्रित किये।जिसमें आठ देश शामिल हैं- अफगानिस्तान, भारत,चीन,नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश,और पाकिस्तान। चर्चा हिमालय क्षेत्र में बढ़ते पारिस्थितिक और मानवीय संकटों पर केंद्रित थी, उन्होंने हिमालय के मौजूदा विरोधाभास का जिक्र किया कि एक तरफ यह एक अरब से अधिक लोगों के लिए आध्यात्मिकता, पानी, जैव विविधता, ऊर्जा एवं पर्यटन का महत्वपूर्ण स्रोत है, फिर भी यह जलवायु प्रभावों के प्रति बेहद नाजुक और कमजोर है। उन्होंने बताया कि स्थिरता के लिए गरीबी, खाद्य असुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, पलायन, जैव-विविधता का नुकसान, बाहरी प्रजातियों का प्रसार और कमजोर ग्लेशियर झीलों की निगरानी जैसे मुद्दों से निपटना जरूरी है।

 

 

 

उन्होंने ऐसे झटकों का सामना करने के लिए समुदाय की मजबूती विकसित करने और हाल के समय में आम हो गए अचानक बाढ़ (flash floods) के खतरे से निपटने के लिए विभिन्न देशों के बीच सीमापार एकजुटता के प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। सच्ची मज़बूती का मतलब है पीड़ित होने की मानसिकता से बाहर निकलना और सक्रिय, समुदाय-आधारित तथा विज्ञान-समर्थित जलवायु कार्रवाई की तलाश करना।

 

 

कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़े पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि हिमालय अभी युवा पर्वत श्रृंखला है। यह विश्व के कई देशों के लिए जीवन दायिनी पर्वत श्रृंखला है। यहां के हिमनदों, नदियों, वन भू-भाग को संयोजित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का घोर संकट उत्पन्न होगा। इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के द्वारा अलग से मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए, जिससे इस पर कार्य किया जा सके।

 

इस अवसर पर SHU के कुलपति प्रो. आर.सी. सुंद्रियाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का खतरा नहीं है; यह एक मौजूदा सच्चाई है जो तेजी से पिघलते ग्लेशियर, अनिश्चित बारिश और बार-बार आने वाली अचानक बाढ़ के रूप में दिख रहा है। उन्होंने कहा कि ‘कमजोरी’ (vulnerability) यह बताती है कि क्या खतरे में है – जैसे कि पारिस्थितिक नुकसान (प्राकृतिक झरनों का सूखना, जंगलों के पैटर्न में बदलाव और जैव विविधता का नुकसान), सामाजिक-आर्थिक प्रभाव (खेती की पैदावार में कमी, जलवायु परिवर्तन के कारण मजबूरन पलायन और पारंपरिक आजीविका का नुकसान), और बुनियादी ढांचे से जुड़े जोखिम (तेजी से शहरीकरण और बुनियादी ढांचा अक्सर आपदाओं को और खराब कर देते हैं)। प्रकृति-आधारित समाधानों (जैसे कंक्रीट की दीवारों के बजाय ढलानों को थामने के लिए प्राकृतिक वनस्पतियों का उपयोग) को अपनाने, स्थानीय शासन को मजबूत और सशक्त बनाने, और ऐसी ‘क्लाइमेट-स्मार्ट इकोनॉमी’ (जलवायु-अनुकूल अर्थव्यवस्था) को चुनने के लिए लचीलेपन की जरूरत है जो संसाधनों के दोहन के बजाय उनके संरक्षण को महत्व देती हो।

 

 

संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि हिमालय का बहुत अधिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है; यह पारिस्थितिक, पर्यावरणीय और जल सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। इसके सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी हैं। हिमालय की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र के लिए जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है।

 

इस अवसर पर स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के सचिव बालकृष्ण चमोली, संयुक्त निदेशक प्रदीप कोठियाल, डीन एकेडमिक राजुल दत, डीन रिसर्च एस. के. श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से तथा प्रत्यक्ष रूप से अनेक लोग एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Ad Ad
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

The True Fact

Author Message

अगर आपको हमारी ख़बरे अच्छी लगती हैं तो किर्पया हमारी खबरों को जरूर शेयर करें, यदि आप अपना कोई लेख या कोई कविता हमरे साथ साझा करना चाहते हैं तो आप हमें हमारे WhatsApp ग्रुप या हमें ई मेल सन्देश भेजकर साझा कर सकते हैं. धन्यवाद

E-Mail: thetruefact20@gmail.com

 

AUTHOR

Author: Pawan Rawat
Website: www.thetruefact.com
Email: thetruefact20@gmail.com
Phone: +91 98970 24402

To Top