गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी फैसला – उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन कारी 9 और 10 जून को 2 दिन तक राज्य भर में इस “काले बिल”की प्रतियां जलाएंगे


राज्यपाल द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने वाले बिल पर दस्तखत किए जाने के विरोध में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन कारी 9 और 10 जून को 2 दिन तक राज्य भर में इस “काले बिल”की प्रतियां जलाएंगे चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक और पूर्व मन्त्री धीरेंद्र प्रताप ने ऐलान किया है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी गैरसैण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के बिल पर राज्य की राज्यपाल बेबी मौर्य द्वारा आज मोहर लगाए जाने के विरोध में कल 9 जून और परसों 10 जून को 2 दिन तक राज्य भार मे इस बिल की प्रतियां को लगाएंगे।
धीरेंद्र प्रताप और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष हरीकृष्ण भट्ट ने यहां जारी एक संयुक्त बयान में कहा है कि जिस तरह से राज्यपाल ने उत्तराखंड के शहीदों और जन आकांक्षाओं के विरुद्ध राज्य की त्रिवेंद्र सरकार द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के बिल पर स्वीकृति की मुहर लगाई है वह राज्य के जहां शहीदों की भावना का अपमान है वहीं राज्य की जनता की जन आकांक्षाओं की भी हत्या है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण अनेकों शहादतो और आंदोलनों के बाद हुआ है। शहीदों और राज्य निर्माण आंदोलन कारियों की सदैव गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाए जाने का ना केवल संकल्प रहा है बल्कि भावना भी रही है।
उन्होंने राज्यपाल के इस बिल पर मोहर लगाए जाने को जनतंत्र की भी हत्या बताया और कहा कि राज्य के आंदोलनकारी 9 और 10 जून को राज्य के तमाम जिलों में और यहां तक की भारत के विभिन्न राज्यों में और विदेशों में भी जहां भी उत्तराखंडी रहते हैं वह इस “तुगलकी आदेश” को “जशविरोधी काला आदेश” मानते हुए,इसकी प्रतियां जलाएंगे। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी नहीं बना दिया जाता हम अंतिम दम तक ये लड़ाई लड़ेंगे ।
धीरेंद्र प्रताप और हरीकृष्ण भट्ट ने कहा कि राज्यपाल के सम्मुख उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों का सरकारी सेवाओं में 10% आरक्षण का बिल वर्षों से लंबित है उस पर तो राज्यपाल जी का ध्यान नहीं गया परंतु भारतीय जनता पार्टी ने जो जो जन आकांक्षाओं के विरुद्ध बिल राज्यपाल के सामने रखा उस पर उन्होंने तुरंत दस्तखत कर दिए। उन्होंने राय व्यक्त की कि राज्यपाल द्वारा यह बिल वापस सरकार के पास भेजा जाना चाहिए था ,यह सलाह देकर कि वह पहले जन आकांक्षाओं की मोहर लगा ले। परंतु राज्यपाल ने इस पर जरा भी ध्यान नहीं दिया। जो बहुत ही दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। धीरेंद्र प्रताप और हरकिशन भट्ट ने कहा कि इसी तुगलकी आदेश के विरुद्ध अब राज्य आंदोलनकारियों ने 9 और 10 जून को 2 दिन तक इस जनविरोधी आदेश की प्रतियां जलाने का फैसला किया है।

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