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बिग ब्रेकिंग:- प्रदेश में गाड़ियों के VIP नंबरों में दलाली का खेल, ऑनलाइन सिस्टम की खामी का फायदा

उत्तराखंड में वाहनों के वीआईपी, मनपसंद नंबरों में दलाली का खेल चल रहा है। दलाल ऑनलाइन सिस्टम की खामियों में सेंधमारी कर इन नंबरों को मुंहमांगी कीमत पर बेच रहे हैं। दलाल वाहन नंबरों की नई सीरीज खुलते ही कई नंबरों को बिना फीस भुगतान किए 24 से 48 घंटे तक होल्ड कर दे रहे हैं। इस अवधि में वह वीआईपी नंबरों की सौदेबाजी के खेल को अंजाम दे रहे हैं।

 

 

सीरीज के ऐसे नंबर जिनके पीछे डबल जीरो जैसे-7700, 3300, 4400 आदि नंबर 10050 रुपये में बुक होते हैं। जोड़े वाले 4455, 5556, 5566 जैसे नंबर 5050 रुपये में बुक करने की सुविधा है। इन्हें छोड़कर सीरीज के किसी भी मनपसंद नंबरों को 2050 रुपये में बुक करवा सकते हैं। दलाल यहां पर खेल कर जा रहे हैं। वह नंबर बुक करते समय पेमेंट जमा करवाने के लिए गलत ओटीपी डाल रहे हैं। इससे नंबर के लिए फीस का भुगतान तो नहीं हो रहा है, लेकिन वह नंबर होल्ड पर चला जा रहा है और लोगों को ये नंबर ऑनलाइन पहले से बिके हुआ दिख रहे हैं।

 

 

 

उत्तराखंड के बड़े आरटीओ और एआरटीओ दफ्तरों में हर महीने ऑनलाइन 10 हजार नंबरों की नई सीरीज जारी होती है। दलाल 10050 रुपये से कम कीमत के ऐसे वीआईपी नंबरों को होल्ड कर दे रहे हैं, जिसकी सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। वह इन्हें बिना फीस जमा किए नंबर 24 से 48 घंटे तक के लिए होल्ड में डाल दे रहे हैं और फिर वाहन स्वामियों से मोटी रकम लेकर होल्ड किए गए नंबरों को बेच रहे हैं। दलाल नंबर बेचने के बाद फीस जमा कर रहे हैं। अगर होल्ड किए गए नंबर पर सौदा नहीं बना तो उन्हें छोड़ दे रहे हैं, जो 24 से 48 घंटे बाद फिर से ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध हो जा रहे हैं।
वाहनों के नए नंबर 24 से 48 घंटों के लिए होल्ड करने की शिकायत मिली है। एनआईसी और एसबीआई को पत्र लिखा गया है। उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया है। जल्द समस्या का समाधान करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आम लोग तय फीस पर ही अपनी पसंद का नंबर ले सकें। -नवीन सिंह, एआरटीओ (प्रशासन), देहरादून।

 

 

परिवहन विभाग से जारी होने वाले वाहनों के नंबर ऑनलाइन हैं। इसमें 10050 रुपये से कम कीमत के वीआईपी नंबर ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जो नंबर बच जाते हैं, उसमें भी अगर कोई मनपसंद नंबर लेना चाहता है तो 2050 रुपये में ऑनलाइन बुक कर सकता है। बाकी जो नंबर बच जाते हैं उन्हें आरटीओ और एआरटीओ कार्यालय से वाहन रजिस्ट्रेशन के दौरान क्रमानुसार आवंटित किया जाता है।

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Author: Pawan Rawat
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