उत्तराखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन की मनमानी से नाराज खिलाड़ी बच्चों ने सरकार की मंत्री रेखा आर्य से मुलाकात की, नाराज बच्चों ने खेल मंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड बाक्सिंग एसोसिएशन ने प्रतिभाशाली छात्रों को दरकिनार करते हुए अपने चहिते बच्चों का चयन किया है।
बॉक्सिंग कोच आशीष कुमार ने आरोप लगाया है कि टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उनके खिलाड़ियों के साथ बार-बार पक्षपात किया जाता है। उनका कहना है कि कई बार वीडियो प्रूफ के बावजूद शिकायत करने पर उनकी बात नहीं सुनी गई। वहीं चयन नहीं होने वाली खिलाड़ी साक्षी ने भी अपने प्रदर्शन और गोल्ड मेडल के बावजूद नेशनल प्रतियोगिता में नहीं भेजे जाने का आरोप लगाया है। दोनों ने इस मामले में खेल मंत्री रेखा आर्या से मुलाकात कर शिकायत रखी है।
बेहतर खेलने वाले बच्चों को भी निर्णय से हराया-कोच
बॉक्सिंग कोच आशीष कुमार ने कहा कि वे पिछले करीब छह साल से बॉक्सिंग अकादमी चला रहे हैं। इस दौरान उनके बच्चे खेल विभाग और स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार हिस्सा लेते रहे हैं। उनका आरोप है कि कई मुकाबलों में बच्चे अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद निर्णय से हरा दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास कुछ मुकाबलों के वीडियो भी हैं, जिनके आधार पर वे अपने आरोप लगा रहे हैं।
पेरेंट्स ने भी उठाई आवाज, बोले- बच्चों का भविष्य दांव पर
आशीष के अनुसार, इस बार प्रतियोगिता में उनके 4-5 बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया। कुछ बच्चों के चयन की पूरी उम्मीद थी, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद खिलाड़ियों के माता-पिता ने भी सवाल उठाए। कोच का कहना है कि अभिभावक बच्चों की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं पर समय व पैसा खर्च करते हैं, इसलिए चयन प्रक्रिया को लेकर उनकी शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जजों की भूमिका पर भी सवाल, सस्पेंडेड होने का आरोप
कोच ने आरोप लगाया कि बॉक्सिंग रिंग में रेफरी, पांच जज, सुपरवाइजर और ज्यूरी की भूमिका होती है। उनका दावा है कि उत्तराखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन की ओर से कुछ चयनकर्ताओं को पहले निलंबित किया गया था, इसके बावजूद उन्हें प्रतियोगिता में जज की भूमिका दी गई। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित लोगों को किस कारण निलंबित किया गया था। इस संबंध में एसोसिएशन की ओर से कोई पक्ष सामने नहीं आया है।
नॉर्थ जोन में गोल्ड के बाद भी नेशनल से बाहर-साक्षी
खिलाड़ी साक्षी ने बताया कि उन्होंने सीबीएसई नॉर्थ जोन प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। उनका कहना है कि इसके बावजूद उनका नाम आगे के चयन में नहीं आया। साक्षी के अनुसार, ट्रेनिंग के दौरान उन्हें बताया गया कि टीम की सीटें पहले ही भर चुकी हैं, इसलिए उन्हें नेशनल प्रतियोगिता में नहीं ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से उनका मनोबल प्रभावित हुआ और उनकी आगे की ट्रेनिंग पर भी असर पड़ा।
पहले भी प्रदर्शन, लेकिन मौके नहीं मिलने का आरोप
साक्षी के अनुसार, इसके बाद भी उन्होंने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और स्टेट स्तर पर गोल्ड मेडल जीता। उनका कहना है कि वे खेलों में आगे बढ़ना चाहती थीं, लेकिन नेशनल स्तर पर मौका नहीं मिलने के बाद उनकी ट्रेनिंग और खेल को लेकर उत्साह प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि इसके बाद उनका ध्यान पढ़ाई की ओर भी चला गया।
फेडरेशन और एसोसिएशन से बात करूंगी-खेल मंत्री
खिलाड़ियों से मुलाकात के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि बॉक्सिंग खिलाड़ियों की ओर से एसोसिएशन से जुड़े कुछ लोगों पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों पर ध्यान नहीं देने की शिकायत की गई है। मंत्री ने कहा कि विभाग सीधे तौर पर एसोसिएशन या फेडरेशन को नियंत्रित नहीं करता, लेकिन शिकायत का संज्ञान लिया गया है। वे फेडरेशन के संबंधित अधिकारियों और एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बात करेंगी। उन्होंने कहा कि कोशिश रहेगी कि बॉक्सिंग खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी न हो और उनके साथ किसी तरह की पक्षपातपूर्ण स्थिति न बने।




