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बिग ब्रेकिंग:- पिथौरागढ़ से दोबारा शुरू हो सकती है कैलाश मानसरोवर यात्रा, अभी लिपूलेख तक पहुंची सड़क

पिथौरागढ़ में कोरोना काल के बाद अब मानसरोवर यात्रा के शुरू होने की उम्मीद है। यदि ऐसा होता है तो इस बार यात्रा पहले से ज्यादा सुगम होगी। कैलास यात्रियों को 95 किलोमीटर पैदल और सात पड़ावों से अब मुक्ति मिलेगी। अब लिपूलेख तक सड़क पहुंच गई है। कोरोना से पहले यात्रियों को आधार शिविर धारचूला से पैदल यह दूरी तय करनी पड़ती थी। इन सात पड़ावों में पांच से छह दिन रहकर कैलास यात्री लिपूलेख पहुंचते थे। सीमांत में 2019 कोरोना काल के बाद यह यात्रा अब तक शुरू नहीं हो पाई है।

 

 

भारत-चीन के बीच पिथौरागढ़ के रास्ते इस साल से मानसरोवर यात्रा शुरू कराने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। मानसरोवर यात्रा के इतिहास में पहली बार पांच साल के बाद यात्रा शुरू हो रही है, जिसमें यात्रियों को सीधे वाहनों से लिपूलेख तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। इसी के साथ 95 किमी से अधिक दूरी आठ पड़ावों में विश्राम के बाद तय करने से भी मुक्ति मिल जाएगी। मानसरोवर यात्रियों को पहली बार भारतीय क्षेत्र में सड़क सुविधा के विस्तार का लाभ मिलेगा। यात्रा शुरू होने की उम्मीद के बाद सीमांत के लोगों में उत्साह है। उनका कहना है कि यात्रा शुरू करने से यहां पर्यटन कारोबार बढ़ेगा और लोगों को रोजगार मिलेगा।

 

 

दशकों से पिथौरागढ़ के धारचूला से तवाघाट के बाद पैदल ही यात्रियों को जाना पड़ता था। यात्री दिल्ली से यहां आकर तवाघाट तक वाहन से सफर कर पहले दिन आठ किमी पैदल चलकर पांगू पहुंचते थे। दूसरे दिन आठ किमी चलकर सिर्खा और तीसरे दिन 17 किमी पैदल चल कर गाला, चौथे दिन 18 किमी चलकर बूंदी, पांचवें दिन 18 किमी चलकर गुंजी पहुंचते थे।

 

 

पिथौरागढ़। जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस साल तीसरी बार बर्फबारी हुई है। घाटी समेत अन्य क्षेत्रों में पूरे दिन बादल छाए रहे। इससे यहां लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। बुधवार को यहां सुबह से अधिकतर क्षेत्रों में बादल छाए रहे। आधे दिन बाद समुद्र सतह से करीब 10 हजार फीट से अधिक के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने रंग बदला। इस क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हुई। राजरंभा, हसंलिग, पंचचूली, नंदा देवी , छिपलाकेदार, त्रिशूली के साथ दारमा और व्यास घाटी के क्षेत्रों में भी हिमपात हुआ है।

 

 

पवित्र कैलास मानसरोवर यात्रा पथ में भी ताजा हिमपात हुआ है। इससे वहां चीन सीमा पर अग्रिम चौकियों में तैनात जवानों को भी कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है। जनपद के अन्य क्षेत्रों में पहले से ही कड़ाके की ठंड पड रही थी अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से इसका असर एक बार फिर से तेज हो गया है। जनपद में अन्य हिस्सों में कई जगह बारिश की संभावना बनीं है।

 

 

पहले सात पड़ावों में ठहर कर और 95 किमी पैदल यात्री लिपूलेख पहुंचते थे। अब पहली बार यात्रियों को सीधे लिपूलेख पहुंचने को वाहन सुविधा मिल सकेगी। -धन सिंह बिष्ट, प्रबंधक, केएमवीएन, टीआरएच, धारचूला।

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Author: Pawan Rawat
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